लख्खू को जब चरण मिले, तब जन्नत की भी शामत हुई……..
कम.जोर जिस्म से हारे चरण को जब लख्खू की नजाकत दिखी
सेहरा मे प्यासे मरीज को जैसे सब्जबाग की इबारत मिली……
आगे जो हुआ फिर उसे मै समझाता हूँ………..
जो बात दोनो के जहन में हुई…….
उसे मै बतलाता हूँ
चरण बोले………...
लख्खू तुम किस चक्की का खाकर आए हो……....
Recession के इस जमाने मे भी size बढाए जाते हो……….
क्या रखा माँस बढाने में …जरा अक्ल से काम करो………….….
Physics की इस दुनिया में …पढो लिखो……और कुछ नाम करो……..…
पढाई placement की चाबी है………इससे satisfaction मिलता है…
इस खेलकूद में क्या रखा…………. पढाई करो…… पढाई करो ..………..
Physics शब्द की शान के आगे खुदा ही नही tao भी झुकता हैं………….
इसीलिए तुम्हे समझाता हूँ...मेरे अनुभव से काम करो......
ये जीवन ये जवानी.....सब इक दिन ख़त्म हो जानी है.....
अगर कुछ रह जायेगी तो वो तुम्हारी पढाई है.........
लख्खू बोले
रहने दो प्रोफ़ेसर.... कॉलेज लाइफ को मत बरबाद करो.....
इस पढ़ाई लिखाई में क्या रखा....खेलो कूदो आराम करो.....
खेलने से कैरेक्टर सुधरता है.....
porned मूवी का चस्का छूटता है ....
आराम से सोचने का फ़िर नींद में मौका मिलता है.....
ब्रहम्चारी होकर जीने का मज़ा ही कुछ और है...
बिना पढाई जीवन आनंद विभोर है .............
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मैं खटरागी हूँ मुझको तो खटिया पर idea आते हैं.........
इसीलिए मेरा मंत्र है...खायो पियो आराम करो......
यदि कुछ करना ही है तो...अधिक ना तुम उत्पात करो......
बस खटिया पर बैठे बैठे लम्बी लम्बी बात करो.....
करने धरने में क्या रखा जो रखा बात बनाने में.....
जो होंठ हिलाने में रस हैं......वो कहाँ हाथ चलाने में......
जीवन जाग्रति में क्या रखा......जो रखा है सो जाने में.....
इसीलिए मैं बोलता हूँ.......ये
खाट बिछा लो रूम पर......
लेटो...बैठो......आराम करो......
